Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 110, Verses 8–9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 110, verses 8–9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 110 · श्लोक 8,9
संस्कृत श्लोक
मरणव्यग्रसामन्तमुक्तनादव्रजद्रजम् ।
इतश्चेतश्च निपतद्वैद्युतोपहतप्रजम् ॥ ८ ॥
अग्निदग्धपतद्गेहप्रोज्झिताग्निमयाम्बुदम् ।
मरणाह्लाददासंख्यशरधारामयाम्बुदम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
धनुष खूब
(कानों तक) ताने जाय, प्रत्यंचाएँ टंकार करें, अर्धमण्डलाकार धनुषों से दिशाएँ मेघश्यामला
हो, धनुषरूपी कुण्डलों से देदीप्यमान गम्भीर सिंहनादवाले शूरवीररूपी मेघ, जिनमें प्रत्यंचारूपी
बिजली कौंध रही है, बाणरूपी जलधारोओं को वर्षायें