Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 110, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 110, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 110 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
उन्नादयोधसंघट्टकंकटोत्कटटांकृतैः ।
लसज्झणझणारावैर्घटितद्वीपमण्डलम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रजा के चित्तरूपी चन्द्रबिम्बों में अपना शुभ्र यश भर
दिया, भूमि में तीनों लोकों में फैलनेवाली कीर्तिरूपी लता लगा दी