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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 110, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 110, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 110 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

पादपातपरापिष्टशरसंजातकर्दमम् । वहद्रक्तनदीरंहःप्रोह्यमाणरथद्विपम् ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

सुहृद, मित्र, पूज्य ब्राह्मण (गुरुवर्ग) और बन्धुबांधवों को विविध रत्नों से खजाने के समान भर दिया, समुद्र के किनारे नारियेलरस का आसव छक कर पीया