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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 111, Verses 2–9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 111, verses 2–9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 2-9

संस्कृत श्लोक

तूर्यभेरीमहाशङ्खखङ्गेषु खे नदत्सु च । धनुर्ध्वनिषु वीराणां तारक्रेंकारकारिषु ॥ २ ॥ अन्योन्यकठिनास्फोटविकटे भटपेटके । कवत्कटकटाटोपे कटुकुट्टितकङ्कटे ॥ ३ ॥ किंचित्प्रभज्यमानासु विशत्कश्मासु संगरे । विपश्चित्पक्षसेनासु लूयमानलतास्विव ॥ ४ ॥ उदभूत्पूरयन्नाशा नृपनिर्याणदुन्दुभिः । चतुर्धाशनिसंपूर्णकल्पाभ्ररवमांसलः ॥ ५ ॥ स्फुटतां कुलशैलानां तुल्यकालमिवोत्कटः । स्फुटच्चटचटास्फोटैर्जडिताखिलदिक्तटः ॥ ६ ॥ लोकपालैरिवाकारैर्नारायणभुजैरिव । स चतुर्भिश्चतुर्दिक्कं निर्जगाम महीपतिः ॥ ७ ॥ चतुरङ्गेण महता सैन्येन परिवारितः । अट्टालवलयात्कृच्छ्रान्निर्गत्य नगराद्बहिः ॥ ८ ॥ ददर्शात्मबलं रिक्तं बलवद्रिपुमण्डलम् । गर्जन्तं च लयाकृत्या भीमं युद्धोद्धतार्णवम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त युद्ध मेँ नगर और गाँव लूटे गये, प्रजामण्डल में महाव्याकुलता छा गई, आग की लपटों से शरीर जलने लगे, धूम्ररूपी मेघों के घने स्तरों से आकाश मण्डल छा गया, बाणो की लगातार घनी वृष्टि ओर निबिड धूम से सूर्य ठक गया, अतएव चारों ओर अन्धकार फैल गया । वहाँ पर क्षण में सूर्यमण्डल दीख पड़ता था और क्षणभर में ओझल हो जाता था। अग्नि की लपटों के तेज संताप से वनों के सब पत्ते मुरञ्या गये थे, चंचल लाठी, शूल, मूसल, पत्थर आदि की राशियों से आकाश पट गया था, अग्नि के प्रतिबिम्बो के पड़ने के कारण हथियारों की चमचमाहट दुगुनी हो रही थी, रण में काम आये हुए महाशूरवीर योद्धाओं को अप्सराएँ ओर सुधा प्राप्त हो रही थी, मदोन्मत्त हाथियों की चिंघाड़ से संग्रामोत्सुक वीरँ को अपार हर्ष हो रहा था, बन्दूकों की गोलियों, भालों, शूलो ओर तोमरो की वर्षा हो रही थी, योद्धाओं के कोलाहल के उल्लास के सुनने मात्र से हृदय फटने के कारण अनेकों कायरों के प्राण-पखेरू उड़ रहे थे, धूलिपटलरूपी सफेद मेघ ने अन्तरिक्ष को आच्छन्न कर दिया था, मरने के लिए व्याकुल हुए सामन्तों के दल के दल चिल्लाते हुए जा रहे थे, इधर उधर गिर रही बिजलियों से (उल्कापातो से) प्रजा का विनाश हो रहा था, अग्नि से जले हुए अतएव गिर रहे गृह अग्नि की वर्षा करनेवाले धूम्रमय मेघो की सृष्टि कर रहे थे । असंख्य बाणो की वृष्टिरूपी धारावाले मेघ मरणाह्वाद प्रदान कर रहे थे