Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 111, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 111, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
रथादिभटचक्रौघशिलाक्रेंकारपीवरः ।
पदातिरथहस्त्यश्वशिलासंघट्टसंकटः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
चमचमा
रहे भालों की श्रेणियों से भालों के वन ऐसे प्रतीत हो रहे भालों से लड़नेवाले योद्धाओं द्वारा काटकर
फेंके गये सिर ओर हाथों से रणभूमि का आकाश पट गया था, क्षेपणो से (गुलेल की तरह का एक
देशी अस्त्र जिससे ढेले दूर दूरतक फेंके जाते हैं ।) फेंके गये पत्थरों की राशियों से दिशारूपी लता
लोधी गई थी