Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 111, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 111, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
कटुचंकारचीत्कारक्रेंकारपरिपीवरः ।
मृता मृता वयमिति घनकोलाहलाकुलः ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
ताल ठोकने आदि से उत्पन्न महान् चट चट शब्दों से विशाल वृक्षों के टूटने
की-सी ध्वनि हो रही थी एवं स्त्रियों के हाहाकार शब्दों से नगरों के घर-के-घर गूँज रहे थे