Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 111, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 111, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
उद्गर्जत्प्रलयाम्भोदैर्वहत्प्रलयवायुभिः ।
प्रपतत्प्रलयासारैः प्रलयाशनिसंकटैः ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त युद्धभूमि हथियाररूपी अग्नि से तथा चारों ओर
फैली हुई अग्नि से भूनी गई थी तथा पूर्ववर्णित युद्धो से तथा अन्यान्य ब्रन्द्युद्धों से वहाँ युद्ध
समाप्ति को नहीं प्राप्त हो रहा था