Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 111, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 111, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
चूर्णीकृतखुरापिष्टमहास्थिघनसैकतः ।
उह्यमानशिलापूरकाष्ठकोटिकटङ्कटः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
उस युद्ध में शूरो के सिंहनाद पर्वतो की गुफाओं में पहुँचकर
प्रतिध्वनियों से मिल गये थे ओर जन्म से लेकर बड़े प्रयत्न से उपार्जित बलसर्वस्व को प्रकट कर
रहे शूरवीरों द्वारा वह चलाया गया था