Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 111, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 111, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
मृतहस्त्यश्वयोधौघजीर्णपर्णनिरन्तरः ।
पिष्टदेहवसामांसपङ्कसंजातकर्दमः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश में चल रहे हथियार प्रक्षणी द्वारा फेंके
गये पत्थर की टक्कर से चूर-चूर हो रहे थे और योद्धाओं के सिंहनाद से, चिघाड़ रहे हाथियों के
समूह से, कन्दराएँ भर गई थीं