Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 112, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 112, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 112 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
मन्दं मन्द्रा महेन्द्राद्रौ क्रन्दन्तः पतिता दिवः ।
आश्वासिता मुनिवरैर्निजाश्रममृगा इव ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
उस श्त्रासत्र वृष्टि के वेग से वह पूर्वोक्त विशाल शत्रु-सेना सागर को शीघ्र ही धूल के ढेर की
भाँति चारों ओर उड़ा दिया गया । उसमें कुछ भी समय नहीं लगा