Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 112, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 112, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 112 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
क्षेत्राटवीपुरजलस्थलशैलकूलकुल्याग्रहारसरिदब्धिभृगुद्रुमेषु ।
ग्रामारपट्टिगिरिकूपगुहागृहेषु भ्रष्टानि कःकलयितुं कुबलानि शक्तः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
शस्त्रास्त्ररूपी लहरों से वटवृक्षं के समान काटे गये मेघ
जल से नम्र हुए थे | वर्षा से पंकयुक्त हुए भूप्रदेश के तट को तोडने से वह विशेष शोभित
थी