Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
स्थितानात्मानमास्तीर्य भूमौ व्याध्यातुरानिव ।
श्वसनार्तांश्चलद्देहान्विवर्तोर्मिमहाभुजान् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जीते हुए
सकल द्वीपो के योद्धा सहाद्रि मेँ छिपकर सात दिन तक विश्राम कर चिकित्सा आदि द्वारा घावों के
पूरे होने से स्वस्थ होकर बाणवृष्टियों से क्लेशित होते हुए कठिनाई के साथ धीरे-धीरे अपने देशों
को चले गये