Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
जडानपि स्पन्दमयान्कल्लोलाकोटकोटरान् ।
संसारानिव विस्तीर्णांश्चक्रावर्तदशाकुलान् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
मारे भय के गन्धमादन पर्वत के पुंनाग वृक्षों के झुरमुट में इकडे हुए गान्धार
देश के योद्धाओं की विद्याधरकुमारियों ने रक्षा की