Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
रत्नराशितटोद्दद्योतपीवरीकृतभास्करान् ।
शङ्खराशिविशद्वातशब्दतर्जितघुंघुमान् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हूण, चीन ओर किराता के सिर विपश्चित्
से छोड़े गये मुँह में आग से युक्त वेगवान् चक्रों से कमलो की तरह काटे गये