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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

इन्द्रनीलतटैर्व्युप्तमुक्ताशुक्तिशताङ्कितैः । क्वचिद्दर्शयतः कान्तशतेन्दुकनखश्रियम् ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

मन्द्रदेश के योद्धा धीरे-धीरे सिसकते-सिसकते द्युलोक के समान ऊँची पर्वत की चोटी से महेन्द्र पर्वत पर गिरे ओर अपने आश्रम के मृगो की भाँति मुनिवरो ने खान, पान, स्थान आदि प्रदान द्वारा उन्हें आश्वासन दिया