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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

नानारत्नांशुकौशेयसूत्रचित्रांस्तरङ्गितान् । विशन्नदीन्दशादिग्भिः समाकीर्णान्पटानिव ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

शकयोद्धाओं को पूर्वसागर की तटभूमि की एला (ईलायची) वन श्रेणियों में पहुँचाकर विपश्चित ने उन्हें एक दिन तक बोधकर छोड़ दिया, अतएव वे यमलोक नहीं गये, नहीं मरे