Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
एलालवङ्गकङ्कोलफलमालां जिघृक्षुभिः ।
वेलावनलताभ्रष्टामात्तावृत्तीञ्जलेचरैः ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
दाशार्णं देश के योद्धा पुराने पत्ते के समान दर्दुराण्य में पहुँचे। वे मूर्ख
विषफल खाकर वहीं पर अपने-आप मर गये