Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
चूतनीपकदम्बाग्रविहगान्प्रतिबिम्बितान् ।
भुञ्जानैर्विप्रलम्भेन कृताच्छोटाञ्जलेचरैः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
हैहयदेश के योद्धा हिमालय मेँ काकतालीयन्याय
से विशल्यकरणी ओषधि को खाकर विद्याधरो की भोति आकाशचारी होकर अपने घर चले
गये