Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
गुहागुलुगुलावर्तनिर्घोषाशनिभाषणान् ।
भृशं भावयतो ग्रस्तानगस्त्यौर्वानलानिव ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रत्येक दिशा की ओर भाग रहे असंख्य योद्धा तरंगों से व्याप्त
नगरों में, लीन हो गये