Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
तरङ्गतरलास्फालमारुतैराहताम्बरान् ।
कन्दरोद्गारगम्भीरैः कल्पान्तजलदालयान् ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
शाल्वदेश के योद्धा बाण, पत्थर और जल से युक्त शत्रुसेना के
आक्रमण करने पर अपने प्रभु के साथ धराशायी हो गये, वे आज भी उस देश के ग्रामदेवतारूप
प्रतिमा बनकर स्थित हैं