Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
जलचारिविहङ्गानां साकाशं प्रतिबिम्बितम् ।
आशयैर्दधतः सारैः पद्मान्भृङ्गमिवात्मगम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे वत्स,
कलिंगों की चंचल और निस्सार हाथियों से युक्त चतुरंग सेना अंग देशवासी योद्धाओं से घायल
होकर तंगण देश में पहुँची