Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 113, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
अतिगाम्भीर्यनैर्मल्यविस्तारविभवैर्नभः ।
निगीर्य संदर्शयतो हृदयादिव बिम्बितम् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
बेचारे मूर्च्छा को प्राप्त हो गये । वहाँपर भ्रान्तिवश विमानचारी ऐसे हो गये