Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 114, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 114, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 114 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अधित्यकासु मेघालीर्नृत्यतां स्वाम्बुभूभृताम् ।
धुनोति जलधिर्बालो गृहधूमावलीमिव ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
दौड़ रहे विपक्षियों
की, अपनी और दूसरों की दर्शनीय सेनाएँ मुमुक्षु जनों के पुण्य-पापों की तरह पूर्णरूप से मटियामेट
हो गई