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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 114, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 114, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 114 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

राकाब्धिपूरसंप्रोतशङ्खशाखास्तटद्रुमाः । चन्द्रबिम्बफलाः कल्पवृक्षा इव विभान्त्यमी ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

इसके उपरान्त जैसे अग्नि की ज्वालाएँ दाह्य वस्तुओं के (लकड़ी आदि के) अभाव से शान्त हो जाती है वैसे ही अपना कार्य सम्पन्न कर चुके दिव्यास्त्र भी आकाश में लीन हो गये