Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 115, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 115 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
प्रभाततूर्यमुखरैर्दिवसैरिव तर्जिता ।
ह्रद्येव स्फुटिता नारी निलीना दयितोरसि ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
ये दिशारए जिनके सागर,
पर्वत, नदियाँ, मेघ, वनपंक्तियाँ अवयव हैं, आपके प्रताप से परिपुष्ट हुई सूर्य की किरणों से
मानों हसती हे