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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 115, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 115 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

एते जम्बुनदीतटा रविकरैराभान्ति हेमाखिलग्रामारण्यपुरस्थलीगिरितरुस्थाण्वग्रहारोच्चयाः । ज्वालालीवलिताबरांतरलिहो मुञ्चन्ति भासोभितस्सर्वा भूमिप भूरिहैवममरासेव्यास्ति नो मानुषैः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

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