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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 115, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 115 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

एषोऽसौ मलयो लयोग्रलवलीवल्लीलसच्चन्दनस्फीतामोदमदाद्रसेन तरवो वक्रे क्रियन्ते त्रिभिः । सज्वालोदहनाक्षसंस्थितकपोलोष्मोदयोत्ताण्डवे अङ्गुष्ठाङ्गुलिभिर्यथोष्णककणास्तप्ता यथा योषिताम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे बलवान्‌ युद्ध -कुशल योद्धा शत्रुओं को जड़ वचनो से ललकारता है वैसे ही यह महेन्द्र पर्वत ऊपर से गरज रहे मेघों को नीचे से गम्भीर गर्जनाओं द्वारा सामने डाँट-फटकार रहा है