Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 116, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 116, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 116 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
मेघाटोपैः प्रलयदहनैरद्रिपक्षाभिघातैस्तारापूरैरमरदितिजक्षुब्धसंग्रामसंघैः ।
व्योमाद्यापि प्रकृतिविकृतिं नाम नायात्यसंख्यैरन्तः साराशयगुणवतां लक्ष्यते नो महिम्नः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
इस मलयाचल पर्वत ने, जिसके सागर से धोये गये सुवर्णमय तटों पर उगे हुए चन्दन वृक्ष साँपों से
परिवेष्टित रहते हैं, विद्याधर स्त्रियों के वदनकमल के कान्तिपुंज से सकल शिलाओं को सुवर्णमय
बना दिया है