Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 116, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 116, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 116 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

यामा ध्वान्तपटेन शीतलरुचिः कर्पूरपूरैः करैरर्कालोकनवांशुकेन दिवसस्तारौघपुष्पोत्करैः । द्यौरम्भोदतुषारवारिकुसुमैः सर्वर्तवो भूषयन्त्येते कालकलात्मनोस्त्रिभुवने व्योमाङ्गणं नाथयोः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

हे राजन्‌, गंगातरंग ओर हिम-कणो से शीतल महेन्द्र पर्वत के तटों को देखिये इनके सुन्दर शिलातलों पर विद्याधर लोग बैठे हैं और इनके पुष्पित वन फूल ओर मेघो से व्याप्त हे