Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 116, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 116, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 116 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
भृङ्गावदोलितलताकुलकाननान्तर्गायत्पुलिन्ददयिताननदत्तनेत्रम् ।
लीलाकुला गतघृणं गिरिगह्वरेषु किं घ्नन्ति शत्रुमिव मुग्धमृगं किराताः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
राजन्, क्रौंचाचल की भूमि
में मन्द-मन्द चलनेवाले मेघवृन्द के गंभीर और तेज गर्जनों से नाच रहे मयूरों से पूर्ण तथा तेज वृष्टि
और वायु से गिरे हुए फूल फल और पल्लवं से पटे हुए ऊँचे वनसमूह को कृपया देखिये