Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
विकासितोद्दण्डसहस्रपत्रकोशस्थलस्थोद्धृरराजहंसम् ।
पीठद्विरेफद्विजलोकजुष्टं भुवीव गेहं कमलासनस्य ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, देखिये, देखिये, अप्सरायें वीरों द्वारा संग्राम में अभिमुख मारे गये हजारों वीर
योद्धाओं को चढ़ा-बढ़ाकर विमानों द्वारा आकाश में जा रही हैं