Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 49
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हिन्दी अर्थ
पर्वत-
कन्दराओं से अपनी गोद में छिपाये गये ग्राम के मैदानों में, जिनमें बगीचों के पेड हारीत पक्षियों से
मनोहर और हरे हैं और बावड़ियों के आसपास हंस.सारस आदि की कूजनरूप निर्मल मधुर तान
सुनाई देती है, मालूम होता है काम स्वेच्छा से आनन्द के साथ मौज लेता है