Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 48
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हिन्दी अर्थ
राजन् देखिये, झरझर शब्द कर रहे रनों के जल से सुहावन इस ग्राम में निकुंज
में विलासवती मयूरियाँ और फूलों से लदी होने के कारण झुकी हुई लताएँ नाचती हैं