Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 47
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हिन्दी अर्थ
राजन्, स्फटिक के खम्भों की
राशियों की तरह रमणीय झरनों के जलो से सुशोभित इस ग्रामरूपी कन्दरा में देखिये, ये मयूरियाँ
नाचती हैं