Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 69
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 69 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 69
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हिन्दी अर्थ
हे राजन्, खिले हुए कमलों के
आकार स्वानुरूप स्थानरूप सरोवर में तैर रहे राजहंसो के साथ थप्पड़ खाने योग्य कुरूप मुँहवाला
पिशाचतुल्य यह कौआ (जिस सुन्दर सरोवर में राजहंस विहार करते हैं उसमें विहार के अयोग्य यह
काला-कलूटा कौआ) इस कीचड़पूर्ण तलैया में घुसकर राजहंसो की नकल उतारने के लिए विविध
लीलाएँ करता है, यह बड़े खेद की बात है, कृपया देखिये