Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 79

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 79 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 79

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

कौओं के झुण्ड में मौन, चेष्टा, पंखादिचालनरूप व्यवहार, वर्ण, रंग और आकार एक-सा होने पर भी यह कान्ति से मनोहर कोयल है, कौआ नहीं है, यों कोयल मूर्ख लोगों के बीच में पण्डित की तरह दूर से पहचाना जाता है । अपनी आकृति से अपना उत्तम गुण सूचित करनेवाले सभी पुरुष अपने अनुरूप हृदय चमत्कार से, भले ही वह गुप्त हो, विख्याति को प्राप्त होते हैं