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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 80

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 80 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 80

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अरे भाई कोयल, कर्णकटु काँव काँव कर रहे कौओं के झुण्ड से भरा हुआ वह शिशिर का समय है, वसन्तरूपी उत्सव नहीं है। इस समय कुहकने से उत्तम गुण (प्रशंसारूप गुण) प्राप्त नहीं होता,अतः कुहकने की आवश्यकता नहीं है । कहीं विशाल वृक्ष के खोखले में, जो गिरे हुए पत्तों से ठका है, चुपचाप बैठे रहो