Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 81
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 81 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 81
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हिन्दी अर्थ
एक आश्चर्य है उसके बाद यह कौवी माँ इस कोयल बच्चों को चोंच और पंजों से घायल करती
है, यह दूसरा आश्चर्य है, यों क्षणभर जब मैं सोचने लगता हूँ तव तक कोयल का बच्चा भी उत्साह
से अपनी माँ के सदुश बढ़ने के लिए तत्पर हो गया, यह तीसरा आश्चर्य है । सचमुच भाग्यवान्
पुरुष जिस दिशा को आता है, वही दिशा उसकी महिमा बढ़ाती है