Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 118, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
अथ रागरक्तहृदयाः स्तनभरवितता विलासललिताङ्ग्यः ।
पथिकानां स्मरणपथं भूयोऽप्यनयन्प्रियाः स्वगेहस्थाः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
कमलवनों में मकरन्द चखने में प्रवीण हे
भ्रमर, तुम कमलों से भरे सरोवर में जाओ मकरन्द से परिपुष्ट अपने शरीर को बेरों की झाड़ियों में
काँटेरूपी आरों से मत चीरो