Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 118, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 42
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हिन्दी अर्थ
हे हंस, जलकाक, बगुला, कौआ आदि
हिंसको से भरे तालाब में सदा अकेले मत रहो, क्योकि इस आपत्ति मेँ भी समान शील, अवस्था
और बोलीवाले अपने वर्ग के साथ संगति से अच्छा ही फल होता है