Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
किंवा तत्तन्न यत्संस्मृतममृतरसाह्लादमंतः करोति ।
त्वत्संगमे सुरतसौख्यरसायनेन बाले ततोऽहमतितृप्ततया श्रमार्तः ।
तत्र स्थितो मृदुनि तल्पतले शशाङ्क बिम्बे शरच्छिशिरनिर्मलशोचिषीव ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राजन्, फूलों
की राशि से सुशोभित यहाँ सरोवर के तट के पेड़ के नीचे सामने भ्रमर रहने पर नयन और कानों
को शोभा से नूतन नील कमल और केतक बिखेर रहे भोले-भाले सुन्दर मृगो को प्रिया को
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