Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
सा लीला ते विलासा वचनमपि च तत्सस्मितं ते
कटाक्षाः सानन्दानन्तरस्य प्रसरसमुचिता दूरमण्येकभूषा ।
तानीहारावसारावहसनचलनावेगविक्षोभितानि ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जलचर मछली आदि जीवों को समीप में जलकौआ, बगुला, चील, बिल्ली,
साँप देखने से जो भय होता है उस भय के आगे वज़पात से हुआ भय तृण के समान नगण्य है। यह
रहस्य बात जातिस्मरण (पूर्वजन्म के ज्ञान) से मछली आदि जलजीवों की योनियों के दुःख का स्मरण
करनेवाले विद्वान् पुरुषों द्वारा अनुभूत है, इसे असत्य नहीं समझना चाहिये