Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
एतावन्तं समयमुचितं तन्वि सार्धं त्वयान्तर्लीलालोलं हृदि चिरतरं तन्मयात्रानुभूतम् ।
यस्मिन्दृष्टेऽमृतह्रद इवोन्मज्जनौघैर्यथासौ राज्याभोगो विशसनमिवाल्पाल्पमेवेति बुद्धिः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
बगुला, अजगर और जलकाक के पेट में बिना चवाये निगले हुये मछली
आदि प्राणियों की जो चित्तस्थिति है, मैं समझता हूँ वह सुषुप्ति-सी (गहरी नींद-सी) या मूर्छा-
सी होती होगी