Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
सहचरा ऊचुः ।
इत्युक्तवति कान्तेऽस्मिन् हा हतास्मीति वादिनी ।
मुग्धा मौग्ध्याद्वरावर्तशङ्कया मूर्च्छिता स्थिता ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
ये मोर बछड़े की तरह मेघो के पीछे-पीछे चलते हँ, मलिन मलिन का ही बच्चा हे,
ऐसा अनुमान होता है