Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

तामेनामेष नलिनीदलवीजेन वारिभिः । आश्वासयंस्तथावस्थां कण्ठेकृत्वात्र संस्थितः ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

पथिक मृगो को देखकर सामने की वस्तुओं मे प्रिया के नेत्रं का चिन्तन करता हुआ कलसे चलनेवाली गुड़िया-सा बन गया है