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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

पुनः पृष्टोऽनया वक्ति पश्य तामेव संकथाम् । एष पार्श्वगतामेनां गृहीत्वा चिबुके प्रियाम् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

मोर भूमि का जल तक ग्रहण नहीं करता, किन्तु साँपों की जबरदस्ती खा डालता है, यह सर्पं की दुरात्मता है अथवा मोर की दुष्टता है, यह मैं नहीं जानता