Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
ज्वलदनलचितिप्रवाहनिर्यत्पवनहतोष्मविशुष्कपर्णवृक्षा ।
ज्वलनपवनभास्करात्मजानां रमणगृहानुकृतिं बिभर्ति सा भूः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मयूर,
यह सागर के जल से भरा हुआ अतः आकाश में चढ़ने की इच्छावाले मेघ नहीं है, यह तो पर्वत से
उठी हुई वनाग्नि से जले हुए वनवृक्षों के खोखले की अग्नि की धूम्रराशि है