Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 29
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हिन्दी अर्थ
इसके बाद इन कमल आदि
के बोझों को क्यों ले जाती हो, यह पूछने पर उन्होंने पूछनेवाले को (मुझको) यह उत्तर दिया-
हे पथिक, हम लोग वियोगरूपी दुःख के ज्वर से सन्तप्त नायिका की बालसखियाँ हैं और उसके
उपचार के लिए कमल आदि के बोझों को ले जाती हैं