Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 30
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त प्रेमपूर्ण हृदयवाली,
स्तनों के भार से नत (झुकी हुईं) तथा विविध हावभावों से मनोहर अंगोवाली वे ललनाएँ देख
रहे पथिकों को उनके घर की प्रियाओं का बार-बार स्मरण कराती हैं