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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 31

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

वहाँ पर कड फएथिक अपनी प्रिया का स्मरण कर कहता हे / वह मेरी प्रिया जल से भरे मेघरूपी अन्धकार से काले आकाश को चिकने तथा मेघ और अन्धकार के समान काले शून्यवन को देखकर प्रलाप करती होगी, भूमिपर गिरती होगी तथा चलते-चलते ठोकर खाती होगी